चलना बहुत है...
अभी तो जागा हूँ, चलना बहुत है।
पूरा कहाँ आधा हूँ, अभी ढलना बहुत है।
ये शहर जो नया-नया लग रहा है।
अभी इसके अन्दर पलना बहुत है।
अभी तो लब हिले हैं, कहना बहुत है।
कुछ सुन रहा हूँ, अभी सुनना बहुत है।
अभी उम्र के गुज़रते पन्नों को भरना बहुत है।
कुछ लिख रहा हूँ, अभी लिखना बहुत है।
अभी तो जागा हूँ, चलना बहुत है...
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